उद्घाटन समारोह PH समिट लखनऊ 2026 का उद्घाटन समारोह 8 अगस्त 2026 को KGMU, लखनऊ के शताब्दी अस्पताल फ़ेज़-2 की 8वीं मंज़िल पर स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। AIIMS ऋषिकेश के पूर्व डायरेक्टर और KGMU के पूर्व वाइस चांसलर, पद्म श्री प्रोफ़ेसर डॉ. रवि कांत मुख्य अतिथि के तौर पर इस कार्यक्रम में शामिल हुए। डॉ. भाषा जे. खान साइंटिफिक चेयर के रूप में मौजूद थे, जबकि डॉ. सुधाकर कंडी विशेष अतिथि के तौर पर शामिल हुए। आयोजन समिति के अध्यक्ष पद्म श्री प्रोफ़ेसर डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्रतिनिधियों और गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया, और आयोजन सचिव प्रोफ़ेसर डॉ. वेद प्रकाश ने उद्घाटन समारोह का संचालन किया। इस समारोह में पल्मोनरी हाइपरटेंशन की देखभाल को बेहतर बनाने, मल्टी-डिसिप्लिनरी सहयोग को मज़बूत करने और मेडिकल शिक्षा, रिसर्च व मरीज़ों की देखभाल में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के महत्व पर ज़ोर दिया गया। प्रो. वेद प्रकाश विभागाध्यक्ष पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग Report Sanjay Agarwal TRINGEL NEWS LUCKNOW 8574663222
PH SUMMIT - 2026
08th & 09th August, 2026
PRESS RELEASE
Date: 08.08.2026
8 और 9 अगस्त को पी0एच0 समिट का आयोजन ।
देश-विदेश से विशेषज्ञों का लखनऊ में जमावड़ा ।
दो दिन पल्मोनरी हाइपरटेंशन पर मंथन ।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का पता अक्सर चलता देर से । इसके लक्षणों का रखें ध्यान ।
सांस फूलना हो सकता है पल्मोनरी हाइपरटेंशन का प्रथम संकेत ।
बीमारी की जल्द पहचान से समय रहते सम्भव है इलाज ।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का पता देर से चलने पर हार्ट लंग ट्रांसप्लांट ही है अंतिम उपचार ।
बीमारी का पता देर से चलने पर 3 साल जीवित रहने की सम्भावना रहती है 55 प्रतिशत ।
PH समिट 2026 का उद्देश्य पल्मोनरी हाइपरटेंशन के क्षेत्र में हुए नये अध्ययन को मरीजों के इलाज तक है पहुंचना। इस समिट से चिकित्सक कर सकेंगे बेहतर इलाज ।
-प्रो0 वेद प्रकाश
डॉ. बाशा जे. खान (नारायणा हेल्थ, बेंगलुरु): “पल्मोनरी हाइपरटेंशन कोई एक बीमारी नहीं है; इसके वर्गीकरण और इसके पीछे की प्रक्रियाओं को समझना ही सही इलाज चुनने की दिशा में पहला कदम है।”
डॉ. प्रकाश एस. (NITRD, दिल्ली): “पल्मोनरी वैस्कुलर फिजियोलॉजी की स्पष्ट समझ हमें यह समझने में मदद करती है कि बीमारी कैसे बढ़ती है और मरीज़ों की स्थिति अलग-अलग तरह से क्यों बदलती है।”
डॉ. संदीप सहाय (ह्यूस्टन, USA): “पल्मोनरी हाइपरटेंशन के इलाज के तरीकों में काफ़ी बदलाव आया है, और हमारा ध्यान सही मरीज़ को सही समय पर सही इलाज देने पर होना चाहिए।”
डॉ. प्रशांत बोभाटे (कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई): “पल्मोनरी हाइपरटेंशन की पुष्टि करने और इसकी हेमोडायनामिक गंभीरता को समझने के लिए राइट-हार्ट कैथीटेराइजेशन सबसे पक्का तरीका बना हुआ है।”
डॉ. सुभाकर कंडी (हैदराबाद): “आधुनिक इलाज के तरीकों ने ग्रुप 1 पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन को एक ऐसी बीमारी से, जो हमेशा जानलेवा होती थी, बदलकर एक ऐसी स्थिति बना दिया है जिसमें लंबे समय तक अच्छी तरह से जीवित रहना संभव है।”
डॉ. अदिति सिंघवी(नारायणा हेल्थ, बेंगलुरु): “लेफ़्ट-हार्ट की बीमारी की वजह से होने वाले पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लिए सही फ़िनोटाइपिंग की ज़रूरत होती है, क्योंकि गलत फ़िनोटाइप का इलाज करना उतना ही मुश्किल हो सकता है जितना कि बीमारी का पता न चल पाना।”
डॉ. मानसी गुप्ता (SGPGI, लखनऊ): “इंटरस्टिशियल लंग डिज़ीज़ (ILD) वाले मरीज़ों में पल्मोनरी हाइपरटेंशन बीमारी के नतीजों को काफ़ी खराब कर सकता है, इसलिए इसकी जल्द पहचान और सही जाँच बहुत ज़रूरी है।”
डॉ. दिगंबर बेहरा (चंडीगढ़): “जोखिम का आकलन हमें यह तय करने में मदद करता है कि किस मरीज को कितना और कितनी जल्दी इलाज की जरूरत है।”
डॉ. जूलियस पुन्नेन (नारायणा हेल्थ, बेंगलुरु): “क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक बीमारी इसलिए खास तौर पर अहम है क्योंकि जिन मरीज़ों की बीमारी का ऑपरेशन हो सकता है, उनका पक्का सर्जिकल इलाज किया जा सकता है।”
डॉ. विकास अग्रवाल (SGPGI, लखनऊ): “कनेक्टिव-टिश्यू बीमारियाँ पल्मोनरी सर्कुलेशन को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए सिस्टेमैटिक स्क्रीनिंग और रुमेटोलॉजी व पल्मोनोलॉजी विभागों के बीच करीबी तालमेल बहुत ज़रूरी है।”
डॉ. शशिराज (नारायणा हेल्थ, बेंगलुरु): “पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन वाले बच्चों में, राइट-वेंट्रिकुलर–पल्मोनरी आर्टेरियल कपलिंग को समझना बहुत ज़रूरी है क्योंकि आखिर में राइट वेंट्रिकल ही फंक्शनल नतीजे तय करता है।
डॉ. सैयद रेहान क्वादेरी (आयरलैंड): “CTEPH पल्मोनरी हाइपरटेंशन के अहम रूपों में से एक है, क्योंकि समय पर इसका पता चलने से इसके पक्के इलाज की संभावना खुल सकती है।”
डॉ. भागीरथ रघुरामन (नारायणा हेल्थ, बेंगलुरु): “क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन के उन मरीज़ों के लिए, जिनकी सर्जरी नहीं हो सकती, बैलून पल्मोनरी एंजियोप्लास्टी ने इलाज के विकल्प बढ़ा दिए हैं।”
डॉ. ध्रुव चौधरी (PGI, रोहतक): “पल्मोनरी हाइपरटेंशन का संकट जिसमें राइट-वेंट्रिकुलर फेलियर भी हो, एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें तेज़ी से पहचान और सही तालमेल के साथ गहन देखभाल (intensive care) जान बचा सकती है।”
डॉ. अपार जिंदल (नई दिल्ली): “गंभीर पल्मोनरी हाइपरटेंशन और राइट-हार्ट फेलियर वाले कुछ खास मरीज़ों के लिए ECMO एक अहम सहारा (bridge) बन सकता है, खासकर तब जब सामान्य इलाज से काम न चल रहा हो।”
डॉ. राहुल चंदोला (नई दिल्ली): “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लंग ट्रांसप्लांटेशन में हुई तरक्की, एडवांस्ड पल्मोनरी हाइपरटेंशन वाले मरीज़ों के इलाज के लिए नई संभावनाएँ खोल रही है।”
डॉ. ज़फ़र नियाज़ (SGPGI, लखनऊ): “पल्मोनरी वैस्कुलर बीमारी में कोई एक इमेजिंग तरीका हर सवाल का जवाब नहीं देता; CT, V/Q स्कैनिंग और MRI, सभी बीमारी का पता लगाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं।”
प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश (KGMU, लखनऊ): “पल्मोनरी हाइपरटेंशन में इलाज के साथ-साथ संक्रमण से बचाव भी मरीज की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”
डॉ. अभिषेक टंडन (मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ): “बायोलॉजिक्स के आने से मुश्किल से ठीक होने वाली ऑब्स्ट्रक्टिव एयरवे बीमारी के बारे में हमारी सोच बदल रही है और इससे कुछ खास मरीज़ों के लिए इलाज की नई संभावनाएँ बन रही हैं।”
डॉ. शुभम अग्रवाल (अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल, लखनऊ): “लॉन्ग-एक्टिंग ब्रोंकोडाइलेशन के तरीकों में लगातार सुधार हो रहा है, और रेवेफेनासिन (Revefenacin) जैसी नई दवाएँ COPD के लक्षणों को लंबे समय तक नियंत्रित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प प्रदान करती हैं।”
महत्वपूर्ण तथ्य एवं आंकडेः-
• पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH), का ग्लोबल एज-स्टैंडर्डाइज़्ड प्रसार (prevalence) प्रति 100,000 आबादी पर लगभग 2.28 मामले है।
• अमेरिका में पल्मोनरी हाइपरटेंशन का सबसे प्रमुख कारण बाएं हिस्से की हृदय संबंधी स्थितियों, जैसे कि लेफ्ट हार्ट फेलियर, के कारण होता है।
• भारत में, पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH) का अनुमानित प्रसार प्रति लाख आबादी पर 0.15 है, जिसमें से 0.06 प्रतिशत मामले इडियोपैथिक (बिना किसी ज्ञात कारण के) हैं।
• भारत में अस्पताल-आधारित रिसर्च के अनुसार, जन्मजात हृदय रोग, कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़, रूमैटिक हार्ट डिज़ीज़ और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) जैसी पहले से मौजूद बीमारियों वाले लोगों में PH के मामले ज़्यादा होते हैं।
• गुर्दे रोग के पीड़ित मरीजों में कंज़र्वेटिव मैनेजमेंट, हीमोडायलिसिस (HD) या कंटीन्यूअस एम्बुलेटरी पेरिटोनियल डायलिसिस (CAPD) से गुज़र रहे 100 मरीज़ों की एक स्टडी में, पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) का कुल प्रसार 41% पाया गया।
• पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH) वाले लगभग 70–80% मरीज़ों में बीमारी का पता तब चलता है जब वे पहले ही बीमारी के गंभीर चरण (WHO फंक्शनल क्लास III या IV) में पहुँच चुके होते हैं।
• पल्मोनरी हाइपरटेंशन का पता अक्सर देर से चलता है; लक्षण शुरू होने से लेकर बीमारी का पता चलने तक का औसत समय 2 साल से ज़्यादा होता है।
• इलाज में तरक्की के बावजूद, बिना इलाज वाले पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH) में मरीज़ के जीवित रहने की औसत अवधि 3 साल से कम होती है,
• लक्षण शुरू होने और बीमारी का पता चलने के बीच औसतन 1.5–2 साल की देरी होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि सांस फूलने और थकान जैसे शुरुआती लक्षण नजर अंदाज कर दिये जाते हैं।
• इडियोपैथिक PAH पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 2–4 गुना ज़्यादा होता है।
• एक अध्ययन के अनुसार, बीमारी की गंभीरता और इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं के आधार पर, इलाज का सालाना खर्च ₹2 लाख से लेकर ₹20 लाख से ज़्यादा तक हो सकता है; खासकर उन मरीज़ों के लिए जिन्हें कॉम्बिनेशन थेरेपी या प्रोस्टासाइक्लिन-बेस्ड इलाज की ज़रूरत होती है।
• जिन मरीज़ों की बीमारी बढ़ चुकी है और मेडिकल थेरेपी से ठीक नहीं हो रही है, उनके लिए लंग ट्रांसप्लांटेशन या हार्ट-लंग ट्रांसप्लांटेशन ही पक्का इलाज का विकल्प है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है जो फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है और तब होती है जब फेफड़ों में रक्तचाप सामान्य से अधिक हो जाता है। इसलिए, हृदय को फेफड़ों में रक्त पंप करने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ता है। सांस फूलना, चक्कर आना और सीने में दर्द कुछ ऐसे लक्षण हैं जो हृदय पर इस बढ़े हुए दबाव के कारण हो सकते हैं।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के प्रकार
ग्रुप 1: पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH)
ग्रुप 2: बाईं ओर की हृदय रोग के कारण पल्मोनरी हाइपरटेंशन
ग्रुप 3: हाइपोक्सिया / फेफड़ों की बीमारी के कारण पल्मोनरी हाइपरटेंशन
ग्रुप 4: क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन (CTEPH)
ग्रुप 5: अज्ञात/कई कारणों से होने वाला पल्मोनरी हाइपरटेंशन
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के कारण
पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) का सटीक कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन यह कुछ ऐसी चिकित्सीय स्थितियों के कारण हो सकता है जो फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं, अवरुद्ध करती हैं या प्रभावित करती हैं। इससे पल्मोनरी धमनियों में उच्च रक्तचाप हो जाता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैः-
बाईं ओर की हृदय रोग
फेफड़ों की बीमारियां और ऑक्सीजन का कम स्तर
फेफड़ों में रक्त के थक्के
पल्मोनरी धमनी में परिवर्तन और अन्य चिकित्सीय स्थितियां: पल्मोनरी हाइपरटेंशन पल्मोनरी धमनियों की छोटी शाखाओं में परिवर्तन के परिणामस्वरूप हो सकता है, जो अक्सर जन्मजात हृदय दोष, HIV संक्रमण, पोर्टल हाइपरटेंशन, संयोजी ऊतक रोगों (जैसे स्क्लेरोडर्मा), या कुछ दवाओं के कारण होते हैं।
कुछ मामले वंशानुगत (heritable) होते हैं या बिना किसी ज्ञात कारण (idiopathic) के होते हैं।
अन्य दुर्लभ कारण: सूजन संबंधी स्थितियां जैसे सारकोइडोसिस, रक्त विकार जैसे सिकल सेल रोग, चयापचय संबंधी विकार जैसे थायरॉयड रोग, क्रोनिक किडनी रोग (CKD), इत्यादि सामान्य कारण हैं।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लक्षण
• सूखी खांसी या खांसी के साथ खून आना
• सीने में दर्द
• कमज़ोरी
• जी मिचलाना और उल्टी होना
• पेट, पैरों या पंजों में सूजन
• सांस फूलना
• चक्कर आना, जिससे बेहोशी भी हो सकती है
• साइनोसिस (होंठ और त्वचा का रंग नीला पड़ना)
• थकान
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के जोखिम कारक
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का जल्द पता लगाने और इसकी रोकथाम के लिए जोखिम कारकों को जानना ज़रूरी है। जिन लोगों में इनमें से एक या ज़्यादा जोखिम कारक हैं, उन्हें अपनी सेहत पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए। अगर उन्हें बिना किसी साफ़ वजह के सांस फूलने, थकान या सीने में दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इन जोखिम कारकों में शामिल हैं:
उम्र: पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन इसका पता अक्सर 30 से 60 साल की उम्र के बीच चलता है। उम्र बढ़ने के साथ दिल और रक्त वाहिकाओं में बदलाव के कारण इसका जोखिम बढ़ जाता है।
पर्यावरण लंबे समय तक हानिकारक पदार्थों (जैसे एस्बेस्टस) के संपर्क में रहने या परजीवियों (पैरासाइट्स) से होने वाले संक्रमण से फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँच सकता है, जिससे पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) का जोखिम बढ़ जाता है।
पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक्स: डाउन सिंड्रोम, जन्मजात हृदय रोग, गौचर रोग जैसी आनुवंशिक स्थितियां और खून के थक्के जमने का पारिवारिक इतिहास, पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
जीवनशैली की आदतें: धूम्रपान और गैर-कानूनी नशीली दवाओं के इस्तेमाल से दिल और फेफड़ों को नुकसान पहुँच सकता है, जिससे सूजन हो सकती है और फेफड़ों में दबाव बढ़ सकता है।
दवाएं: कैंसर और डिप्रेशन की कुछ दवाएं फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकती हैं और पल्मोनरी हाइपरटेंशन का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
लिंग: पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) होने की संभावना ज़्यादा होती है, खासकर हार्ट फेलियर या अज्ञात कारणों (इडियोपैथिक) से होने वाले मामलों में; ऐसा शायद हार्मोन या ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण हो सकता है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का पता लगाना
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का पता लगाना मुश्किल होता है क्योंकि इसके लक्षण दिल या फेफड़ों की दूसरी बीमारियों जैसे ही होते हैं। पल्मोनरी हाइपरटेंशन का पता लगाने के लिए नीचे दिए गए तरीके अपनाए जाते हैं:
मरीज़ की मेडिकल हिस्ट्री
शारीरिक जांच
शुरुआती नॉन-इनवेसिव टेस्टः-
• ब्लड टेस्ट (दूसरी वजहों का पता लगाने के लिए)
• इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG या EKG)
• चेस्ट X-रे
मुख्य स्क्रीनिंग टेस्ट
• ट्रांसथोरेसिक इकोकार्डियोग्राफी
अतिरिक्त डायग्नोस्टिक टेस्ट
• लंग फंक्शन टेस्ट (फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच)
• स्लीप स्टडी (नींद की जांच)
• एक्सरसाइज टेस्ट
एडवांस्ड इमेजिंग
• कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT) स्कैन
• कार्डियोवैस्कुलर मैग्नेटिक रेजोनेंस (CMR)
• वेंटिलेशन/परफ्यूजन (V/Q) स्कैन
पुष्टि करने वाला टेस्ट
• राइट हार्ट कैथीटेराइजेशन
खास टेस्ट (ज़रूरत पड़ने पर)
• जेनेटिक टेस्टिंग
• लंग बायोप्सी
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का इलाज
हालांकि पल्मोनरी हाइपरटेंशन को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इलाज से इसके लक्षणों को कम करने और स्थिति को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिल सकती है। पल्मोनरी हाइपरटेंशन के इलाज के विकल्प इस प्रकार हैं:
PH का बिना दवा वाला इलाज
• खान-पान में बदलाव
• जीवनशैली में बदलाव
• ऑक्सीजन थेरेपी
PH का दवा से इलाज
टारगेटेड थेरेपी: एंडोथेलिन रिसेप्टर एंटागोनिस्ट, फॉस्फोडिएस्टरेज़ टाइप-5 इनहिबिटर, प्रोस्टासाइक्लिन एनालॉग और रिसेप्टर एगोनिस्ट और सॉल्युबल गुआनिलेट साइक्लेज स्टिमुलेटर
• कैल्शियम चैनल ब्लॉकर
• डाययुरेटिक्स
• एंटीकोआगुलंट्स
PH का सर्जिकल इलाज
• पल्मोनरी एंडार्टरेक्टॉमी
• बलून एंजियोप्लास्टी
• बलून एट्रियल सेप्टोस्टॉमी
• फेफड़े का प्रत्यारोपण (लंग ट्रांसप्लांटेशन)
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ का पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग, 8 और 9 अगस्त 2026 को KGMU के शताब्दी फ़ेज़-2 अस्पताल के 8वीं मंज़िल के ऑडिटोरियम में 'PH समिट लखनऊ 2026 – पल्मोनरी हाइपरटेंशन पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस' आयोजित कर रहा है। "एडवांसिंग डायग्नोसिस, थेराप्यूटिक्स एंड आउटकम्स" (निदान, इलाज और नतीजों को बेहतर बनाना) थीम वाली इस दो-दिवसीय कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के जाने-माने एक्सपर्ट्स पल्मोनरी हाइपरटेंशन के निदान और मैनेजमेंट में हुई नई तरक्की पर चर्चा करेंगे। यह विभाग पल्मोनरी हाइपरटेंशन वाले मरीज़ों की पूरी जांच और इलाज में सक्रिय रूप से शामिल है, खासकर उन मरीज़ों के मामले में जिन्हें क्रोनिक लंग डिज़ीज़ (फेफड़ों की पुरानी बीमारी) और इंटरस्टिशियल लंग डिज़ीज़, पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन और क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां हैं। मरीज़ों की व्यवस्थित जांच के लिए पल्मोनरी फ़ंक्शन टेस्टिंग, इकोकार्डियोग्राफी, एडवांस्ड इमेजिंग और दूसरी जांचें की जाती हैं, और ज़रूरत पड़ने पर कार्डियोलॉजी, रुमेटोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस और दूसरी स्पेशलिटीज़ के साथ मिलकर काम किया जाता है। विभाग गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों (जिन्हें पल्मोनरी हाइपरटेंशन क्राइसिस और राइट वेंट्रिकुलर फ़ेलियर की समस्या हो) के लिए खास देखभाल भी देता है। साथ ही, यह विभाग इस बीमारी की जल्दी पहचान, सही रिस्क स्ट्रैटिफ़िकेशन (जोखिम का आकलन) और सबूतों पर आधारित इलाज को बढ़ावा देता है, क्योंकि अक्सर इस बीमारी का पता देर से चलता है।
मुख्य वैज्ञानिक सत्र – PH समिट 2026
वैज्ञानिक कार्यक्रम को पल्मोनरी हाइपरटेंशन (PH) के बारे में बुनियादी जानकारी और निदान से लेकर एडवांस्ड इलाज और क्रिटिकल केयर मैनेजमेंट तक की जानकारी देने के लिए तैयार किया गया है। मुख्य सत्रों में PH की परिभाषाएं और मौजूदा कॉन्सेप्ट, पल्मोनरी वैस्कुलर फिजियोलॉजी, PH और राइट वेंट्रिकुलर फंक्शन का इकोकार्डियोग्राफिक असेसमेंट, राइट-हार्ट कैथीटेराइजेशन और वैसो-रिएक्टिविटी टेस्टिंग, रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन और ग्रुप 1 PAH के लिए आधुनिक फार्माकोथेरेपी शामिल थे। इस कार्यक्रम में लेफ्ट-हार्ट की बीमारी के कारण होने वाले ग्रुप 2 PH, इंटरस्टिशियल लंग डिजीज से जुड़े PH, CTD से जुड़े PAH और बच्चों में होने वाले पल्मोनरी हाइपरटेंशन पर भी चर्चा की गयी।
क्रोनिक थ्रोम्बोएम्बोलिक पल्मोनरी हाइपरटेंशन (CTEPH) पर खास ज़ोर दिया गया, जिसमें इसका निदान और इलाज, सर्जिकल इंटरवेंशन, बैलून पल्मोनरी एंजियोप्लास्टी और कैथेटर-बेस्ड पल्मोनरी वैस्कुलर इंटरवेंशन शामिल थे। एडवांस्ड सत्रों में CT, V/Q स्कैनिंग और MRI का इस्तेमाल करके मल्टी-मोडैलिटी इमेजिंग, ICU में PH क्राइसिस और एक्यूट राइट वेंट्रिकुलर फेलियर, और गंभीर पल्मोनरी हाइपरटेंशन में ECMO की भूमिका पर चर्चा की गयी।
वैज्ञानिक चर्चाओं को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ , यू0एस0ए0 के डॉ. संदीप सहाय और आयरलैण्ड के डॉ. सैयद रेहान क्वादेरी के साथ-साथ देश के जाने-माने विशेषज्ञ और फैकल्टी सदस्यों ने और भी समृद्ध बनाया। इनमें डॉ. दिगंबर बेहरा, डॉ. ध्रुव चौधरी, डॉ. शुभाकर कंडी, डॉ. जूलियस पुन्नेन, डॉ. प्रकाश एस, डॉ. प्रशांत बोभाटे, डॉ. मांसी गुप्ता, डॉ. सत्यवीर यादव, डॉ. अदिति सिंघवी, डॉ. विकास अग्रवाल, डॉ. गौरव चौधरी, डॉ. बाशा जलाल खान, डॉ. ज़फ़र नियाज़, डॉ. अपार जिंदल, डॉ. राहुल चंदोला और डॉ. अभिषेक टंडन जैसे कई अन्य प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हुए।
उद्घाटन समारोह
PH समिट लखनऊ 2026 का उद्घाटन समारोह 8 अगस्त 2026 को KGMU, लखनऊ के शताब्दी अस्पताल फ़ेज़-2 की 8वीं मंज़िल पर स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। AIIMS ऋषिकेश के पूर्व डायरेक्टर और KGMU के पूर्व वाइस चांसलर, पद्म श्री प्रोफ़ेसर डॉ. रवि कांत मुख्य अतिथि के तौर पर इस कार्यक्रम में शामिल हुए। डॉ. भाषा जे. खान साइंटिफिक चेयर के रूप में मौजूद थे, जबकि डॉ. सुधाकर कंडी विशेष अतिथि के तौर पर शामिल हुए। आयोजन समिति के अध्यक्ष पद्म श्री प्रोफ़ेसर डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्रतिनिधियों और गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया, और आयोजन सचिव प्रोफ़ेसर डॉ. वेद प्रकाश ने उद्घाटन समारोह का संचालन किया। इस समारोह में पल्मोनरी हाइपरटेंशन की देखभाल को बेहतर बनाने, मल्टी-डिसिप्लिनरी सहयोग को मज़बूत करने और मेडिकल शिक्षा, रिसर्च व मरीज़ों की देखभाल में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के महत्व पर ज़ोर दिया गया।
प्रो. वेद प्रकाश
विभागाध्यक्ष
पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग
Report Sanjay Agarwal
TRINGEL NEWS LUCKNOW
8574663222




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