Sanjay Agrawal Tringel News Lucknow 8574663222 शिवधनुष भंग के साथ जनकपुरी में जय श्रीराम की गूंज_* डिजिटल लाइट एंड साउंड से सजा ऐशबाग की ऐतिहासिक रामलीला का मंच । यहां मंचन में दिखती है बंगाल और यूपी के कलाकारों के मिश्रित प्रयास की झलक । लखनऊ । ऐशबाग की ऐतिहासिक रामलीला के मंचन में सोमवार को मिथला नरेश राजा जनक की पुत्री सीता के स्वयंवर का आयोजन हुआ राजा की शर्त है कि जो भी योद्धा भगवान शिव के धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी से वह अपनी बेटी सीता का विवाह करेंगे। उनकी इस घोषणा को सुनकर तमाम बलशाली राजा सीता स्वयंवर में शामिल होने आए जहां पर गुरु विश्वामित्र के साथ अयोध्या के राजकुमार श्रीराम और लक्ष्मण भी इस आयोजन में पधारे हैं । सभी पराक्रमी राजाओं ने धनुष को उठाने का प्रयास किया लेकिन कोई शिव धनुष को हिला भी न सका यह देख महाराज जनक विकल हो उठे तभी गुरु विश्वमित्र की आज्ञा मिलते ही श्रीराम ने शिव धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया तो धनुष टूट गया । धनुष टूटते ही जनक नंदिनी सीता श्रीराम के गले में वरमाला पहना देती हैं । इस दृश्य के साथ ही पूरा रामलीला परिसर सियावर रामचन्द्र की जय के जयकारों से गूज उठा । धनुष भंग की गर्जना सुनकर क्रोधित भगवान परशुराम भी सभा मे पहुंचते हैं जहां उनके और लक्ष्मण जी के बीच तीखे संवाद होते हैं जिन्हे सुनकर दर्शक रोमांचित हो उठे। इसके बाद श्रीराम ने अपने मधुर वचनों से भगवान परशुराम के क्रोध की अग्नि को शांत कर दिया । जब यह संदेश अयोध्या जाता है तो वहाँ पूरी नगरी में हर्ष और उल्लास जैसा वातावरण हो बन जाता है और अयोध्या नरेश दशरथ श्रीराम की बारात लेकर जनकपुरी पहुंचते हैं और सीताराम के विवाह के साथ ही भरत का माण्डवी के साथ लक्ष्मण का उर्मिला के साथ और शत्रुघ्न का विवाह श्रुतकीर्ति के साथ विवाह कराने के उपरांत बारात की विदाई का दृश्य मंचित किया जाता हैं राजा जनक की बेटियों की विदाई के जीवंत दृश्यों ने दर्शकों को भी भावुक कर दिया । रामलीला के मंचन से पूर्व सांस्कृति मंच पर शहर के कलाकारों ने अपनी कला का मंच पर प्रस्तुत किया । घृताक्षी संगीत शाला के कलाकारो द्वारा सीता स्वयंबर की नाट्य प्रस्तुति दी जिसमे सीता की भूमिका अलंकृति राउत, श्रीराम की भूमिका अक्षय लांबा तथा लक्ष्मण की भूमिका देवयांश त्रिवेदी के साथ अन्य भूमिकाओं में प्रिशा, दिव्या, ईशा, उर्वी, अनाइका, सान्वी, आराध्या, काव्या, रियांशा, पाखी, गीतांजलि, सामंथा, वंदिता, सविता जी, वैष्णवी शुक्ला, आद्रिका मिश्रा, रीत बजाज, नंदिता माथुर एवं आकृति अग्रवाल ने सहभागिता की। नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन मुस्कान खत्री द्वारा किया गया, जबकि संगीत निर्देशन एवं संगीत संयोजन सत्येंद्र आर्य के द्वारा किया गया । इसके उपरांत हुमा साहू एवं उनके साथी कलाकारों ने मंच पर भाव नृत्यों की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया । श्री ऐशबाग रामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचंद्र अग्रवाल ने बताया की मंगलवार को होने वाली रामलीला में श्रीराम की बारात का अयोध्या में आगमन, श्रीराम के राज्याभिषेक का निर्णय, राजा दशरथ का श्रीराम से संवाद , मंथरा द्वारा कैकेई के कान भरना, कैकेई का कोप, श्री सीता-राम व लक्ष्मण का वन गमन व अवध की प्रजा द्वारा श्रीराम के वनवास के निर्णय का विरोध किए जाने की लीलाएं प्रमुख रूप से दिखाई जाएंगी । Sanjay Agrawal Tringel News Lucknow 857466322
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शिवधनुष भंग के साथ जनकपुरी में जय श्रीराम की गूंज_*
डिजिटल लाइट एंड साउंड से सजा ऐशबाग की ऐतिहासिक रामलीला का मंच ।
यहां मंचन में दिखती है बंगाल और यूपी के कलाकारों के मिश्रित प्रयास की झलक ।
लखनऊ । ऐशबाग की ऐतिहासिक रामलीला के मंचन में सोमवार को मिथला नरेश राजा जनक की पुत्री सीता के स्वयंवर का आयोजन हुआ राजा की शर्त है कि जो भी योद्धा भगवान शिव के धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी से वह अपनी बेटी सीता का विवाह करेंगे। उनकी इस घोषणा को सुनकर तमाम बलशाली राजा सीता स्वयंवर में शामिल होने आए जहां पर गुरु विश्वामित्र के साथ अयोध्या के राजकुमार श्रीराम और लक्ष्मण भी इस आयोजन में पधारे हैं ।
सभी पराक्रमी राजाओं ने धनुष को उठाने का प्रयास किया लेकिन कोई शिव धनुष को हिला भी न सका यह देख महाराज जनक विकल हो उठे तभी गुरु विश्वमित्र की आज्ञा मिलते ही श्रीराम ने शिव धनुष को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया तो धनुष टूट गया ।
धनुष टूटते ही जनक नंदिनी सीता श्रीराम के गले में वरमाला पहना देती हैं । इस दृश्य के साथ ही पूरा रामलीला परिसर सियावर रामचन्द्र की जय के जयकारों से गूज उठा ।
धनुष भंग की गर्जना सुनकर क्रोधित भगवान परशुराम भी सभा मे पहुंचते हैं जहां उनके और लक्ष्मण जी के बीच तीखे संवाद होते हैं जिन्हे सुनकर दर्शक रोमांचित हो उठे।
इसके बाद श्रीराम ने अपने मधुर वचनों से भगवान परशुराम के क्रोध की अग्नि को शांत कर दिया । जब
यह संदेश अयोध्या जाता है तो वहाँ पूरी नगरी में हर्ष और उल्लास जैसा वातावरण हो बन जाता है और अयोध्या नरेश दशरथ श्रीराम की बारात लेकर जनकपुरी पहुंचते हैं और सीताराम के विवाह के साथ ही भरत का माण्डवी के साथ लक्ष्मण का उर्मिला के साथ और शत्रुघ्न का विवाह श्रुतकीर्ति के साथ विवाह कराने के उपरांत बारात की विदाई का दृश्य मंचित किया जाता हैं राजा जनक की बेटियों की विदाई के जीवंत दृश्यों ने दर्शकों को भी भावुक कर दिया ।
रामलीला के मंचन से पूर्व सांस्कृति मंच पर शहर के कलाकारों ने अपनी कला का मंच पर प्रस्तुत किया । घृताक्षी संगीत शाला के कलाकारो द्वारा सीता स्वयंबर की नाट्य प्रस्तुति दी जिसमे सीता की भूमिका अलंकृति राउत, श्रीराम की भूमिका अक्षय लांबा तथा लक्ष्मण की भूमिका देवयांश त्रिवेदी के साथ अन्य भूमिकाओं में प्रिशा, दिव्या, ईशा, उर्वी, अनाइका, सान्वी, आराध्या, काव्या, रियांशा, पाखी, गीतांजलि, सामंथा, वंदिता, सविता जी, वैष्णवी शुक्ला, आद्रिका मिश्रा, रीत बजाज, नंदिता माथुर एवं आकृति अग्रवाल ने सहभागिता की। नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन मुस्कान खत्री द्वारा किया गया, जबकि संगीत निर्देशन एवं संगीत संयोजन सत्येंद्र आर्य के द्वारा किया गया ।
इसके उपरांत हुमा साहू एवं उनके साथी कलाकारों ने मंच पर भाव नृत्यों की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया ।
श्री ऐशबाग रामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचंद्र अग्रवाल ने बताया की मंगलवार को होने वाली रामलीला में श्रीराम की बारात का अयोध्या में आगमन, श्रीराम के राज्याभिषेक का निर्णय, राजा दशरथ का श्रीराम से संवाद , मंथरा द्वारा कैकेई के कान भरना, कैकेई का कोप, श्री सीता-राम व लक्ष्मण का वन गमन व अवध की प्रजा द्वारा श्रीराम के वनवास के निर्णय का विरोध किए जाने की लीलाएं प्रमुख रूप से दिखाई जाएंगी ।
Sanjay Agrawal
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